संजय कौशिक 'विज्ञात' जी का बहुत पसंद किया जाने वाला गीत व्यंजना कितनी समेटूं पृष्ठों पर मनमीत मेरे देख अक्षर मौन हैं अब शांत हैं सब भाव मेरे मंद है बेशक कलम पर जानती है घाव मेरे इस हवा से जब छिपाये रक्त रंजित स्राव मेरे सागरों की उर्मियों में भी बसे अब गीत मेरे व्यंजना कितनी समेटूं पृष्ठों पर मनमीत मेरे हो सके तो छोड़ दे तू इस कलम से खेलना फिर मुक्त अभिव्यक्ति लिखेगी तो सहज हो झेलना फिर बन्द करना ये पड़ेगा तू करे अवहेलना फिर दाव पर मैं स्वप्न मेरे हारते तब जीत मेरे व्यंजना कितनी समेटूं पृष्ठों पर मनमीत मेरे बादलों ने पीर गाई घाटियाँ गुंजित हुई तब लेखनी की वेदना से वेदना कंपित हुई तब बिम्ब बनते कथ्य के बिन बात वो लंबित हुई तब आज तक अटकी हुई जो भाग्य की वो रीत मेरे व्यंजना कितनी समेटूं पृष्ठों पर मनमीत मेरे संजय कौशिक 'विज्ञात'
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दिनाँक - 3/02/2020 दिन - सोमवार विषय - *पशुधन* विधा - दोहा छंद गौ की सेवा से हुआ, जीवन का उद्धार। दूध दही नवनीत है, भोजन के आधार।। गौ की रक्षा जो करे, होगा बेड़ा पार। वैतरणी ही वो तरेे, जो जीवन का सार।। गौ धन है सबसे बड़ा, धन से मत तू तोल। भवसागर से तार दे, दिल की आँखे खोल।। गोबर डालो खेत में ,है यह अच्छी खाद। स्वस्थ फसल तैयार हो, पक जाने के बाद।। गैया संगत खेलते, होते सदा विभोर। माखन नित ही खा रहे, देखो माखन चोर।। ✒ राधा तिवारी "राधेगोपाल" खटीमा ऊधम सिंह नगर उत्तराखंड
आल्हा में *अलंकार सीखें और छंद में -समावेश करें-* बिंदु प्रसाद रिद्धिमा*
विषय *आल्हा छंद को आकर्षक बनाने के लिए ऐसा करें*------ मां शारदे को नमन🙏🙏 कलम की सुगंध छंदशाला मंच को नमन🙏🙏 **1** *कलम की सुगंध छंद शाला से जुड़े* *2* *आदरणीय संजय कौशिक विज्ञात जी के साथ साथ समीक्षक समूह के वरिष्ठ रचनाकारों के छंदों को पढ़ें और समझे* *3* *मात्रा भार और मापनी पर विशेष ध्यान हो* *4* *आल्हा छंद वीर रस आधारित छंद है ,वीर शब्द की पर्यायवाची सूची अपने पास रखें।आवश्यकता अनुसार उपयोग करे* *5* *आप चयनित विषय का गहन अध्ययन कर उसके साथ सच्चाई पेश करें* *6* *लेखनी को लय देकर सृजन करें* *7* *अलंकार सीखें और छंद में समावेश करें ,कठिन नहीं है* *8* *आदरणीय गुरुदेव जी की आशीष और अपनी सतत् प्रयास से सुंदर छंद लिखकर साहित्य सेवा की जा सकती है* 🙏🙏 धन्यवाद🌹🌹 * बिंदु प्रसाद रिद्धिमा* *राँची, झारखंड*

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